
22 अप्रैल—आज पूरी दुनिया Earth Day मना रही है। वर्ष 2026 की वैश्विक थीम “Our Future, Our Planet” (हमारा भविष्य, हमारा ग्रह) हमें एक कड़वी सच्चाई से रूबरू कराती है—अगर आज हमने अपनी धरती को नहीं बचाया, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य अंधकारमय होगा।
लेकिन सवाल यह है कि क्या वातानुकूलित कमरों में बैठकर नीतियां बनाने वाले कभी ज़मीनी सच्चाई देखने निकलते हैं? क्या उन्होंने वेस्ट सिंहभूम की उन नदियों को देखा है, जो अब लाल जहर में बदल चुकी हैं? या उन गांवों की हवा में सांस ली है, जहां धूल ही जीवन का हिस्सा बन चुकी है?
खनिजों से समृद्ध, जीवन से गरीब कोल्हान
कोल्हान डिवीज़न —जिसमें पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां शामिल हैं—देश ही नहीं, दुनिया के सबसे समृद्ध खनिज क्षेत्रों में गिना जाता है।
लेकिन विडंबना देखिए—यहां की धरती सोना और लोहा उगलती है, और यहां के मूल निवासियों के हिस्से आता है प्रदूषण, बीमारी और विस्थापन।
खनन कंपनियां: विकास या विनाश?
स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडियन लिमिटेड – किरीबुरु, मेघाहातुबुरु, गुआ, चिड़िया
यूरेनीयम कारपोरेशन ऑफ़ इंडियन लिमिटेड – जादूगोड़ा, तुरामडीह
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड – घाटशिला, मुसाबनी
नेशनल मिनरल्स डेवलपमेंट कारपोरेशन – नई परियोजनाएं
निजी क्षेत्र
टाटा स्टील – नोआमुंडी
रूंगटा माइंस लिमिटेड
उषा मार्टिन & ACC लिमिटेड
वेदांता लिमिटेड (सेसा गोवा)
इन कंपनियों के जरिए अरबों का राजस्व पैदा होता है, लेकिन पर्यावरणीय नियम अक्सर कागजों तक सीमित रह जाते हैं।
पर्यावरणीय संकट: कोल्हान की चीख
जल प्रदूषण – ‘लाल पानी’ की त्रासदी
लौह अयस्क के अपशिष्ट से नदियों का रंग बदल चुका है। कोयना रिवर और बैतरनी रिवर अब जीवनदायिनी नहीं, बल्कि बीमारी का स्रोत बनती जा रही हैं।
वायु प्रदूषण – सांस भी बोझ
खनन, ब्लास्टिंग और भारी ट्रकों से निकलने वाली धूल ने हवा को जहरीला बना दिया है। PM 10 और PM 2.5 स्तर खतरनाक सीमा पार कर चुके हैं।
सारंडा का संकट
एशिया का प्रसिद्ध Saranda Forest खंडित हो रहा है। हाथियों के कॉरिडोर टूटने से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ा है।
रेडियोधर्मी खतरा
जादुगोडा क्षेत्र में यूरेनियम खनन के कारण रेडिएशन का खतरा लगातार बना हुआ है।
प्रशासन और DMFT पर सवाल
डिस्ट्रिक्ट मिनरल्स फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) का पैसा—जो प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य और पुनर्वास के लिए है—अक्सर जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पाता।
न ट्रकों के लिए अलग कॉरिडोर, न धूल नियंत्रण के ठोस उपाय—नियम सिर्फ फाइलों में बंद हैं।
उम्मीद की किरण: जमीनी संघर्ष
इतने बड़े संकट के बीच कुछ संगठन उम्मीद की मशाल जलाए हुए हैं:
आदिवासी मित्र मण्डल (चक्रधरपुर),कोल्हान नितिर तुरतुंग,देशाउली फाउंडेशन
आदिवासी हो समाज महासभा
ये संगठन जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं और समाज को जागरूक बना रहे हैं।
आज संकल्प का दिन
विश्व पृथ्वी दिवस सिर्फ पौधे लगाने या सोशल मीडिया पोस्ट करने का दिन नहीं है।
यह दिन है—जवाबदेही मांगने का, आवाज उठाने का और बदलाव की शुरुआत करने का।
अगर कोल्हान बचेगा, तो ही विकास सार्थक होगा।अगर प्रकृति बचेगी, तो ही मानवता बचेगी।
रबिन्द्र गिलुवा
सचिव, आदिवासी युवा मित्र मण्डल