
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस जमीन पर निर्माण हो रहा है, वह रेलवे से जुड़ी बताई जा रही है। इसके बावजूद अब तक न तो किसी प्रकार की रोक लगाई गई और न ही प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई देखने को मिली। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस अवैध निर्माण को संरक्षण कौन दे रहा है?

लोगों का कहना है कि अगर रेलवे प्रशासन छोटे दुकानदारों, गरीबों और आम लोगों को नोटिस भेजकर कार्रवाई कर सकता है, तो फिर इतने बड़े निर्माण कार्य पर उसकी नजर क्यों नहीं पड़ रही? क्या रेलवे के कुछ भ्रष्ट अधिकारी इस पूरे खेल में शामिल हैं, या फिर स्थानीय थाना की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कराया जा रहा है?

इलाके में चर्चा है कि बिना किसी राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के इतना बड़ा निर्माण संभव नहीं है। यही वजह है कि अब मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि रेलवे प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करता है या फिर बाकी मामलों की तरह यह मुद्दा भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।