
जमशेदपुर। महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में साकची गोलचक्कर के समीप आयोजित नुक्कड़ सभा में जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह ने भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए।

कांग्रेस का आरोप: “मंशा में खोट, लागू करने में देरी”
नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है, जबकि इसे लागू करने में जानबूझकर देरी की जा रही है।
कांग्रेस का कहना है कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं, बल्कि इसकी पुरानी समर्थक रही है।
बिल क्या कहता है?
महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना है।
नरेन्द्र मोदी सरकार का दावा है कि उसने वर्षों से लंबित इस मुद्दे को आगे बढ़ाया।

कांग्रेस की मुख्य आपत्तियां तुरंत लागू क्यों नहीं?
कांग्रेस का सवाल है कि बिल पास होने के बाद भी इसे तुरंत लागू क्यों नहीं किया गया।
पहले जनगणना (Census)
फिर परिसीमन (Delimitation)
उसके बाद आरक्षण लागू
इससे कई वर्षों की देरी संभव है।
OBC महिलाओं के लिए अलग कोटा नहीं
कांग्रेस का तर्क:
33% आरक्षण में OBC महिलाओं के लिए अलग sub-quota नहीं
इससे पिछड़े वर्ग की महिलाओं को पूरा लाभ नहीं मिलेगा
Delimitation से संतुलन पर असर
कांग्रेस और अन्य दलों का कहना है कि परिसीमन से:
कुछ राज्यों की सीटें बढ़ेंगी
कुछ की घटेंगी
इससे राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
“सिर्फ श्रेय लेने की राजनीति”
कांग्रेस का आरोप है कि BJP ने ऐसा बिल लाया है, जो दिखने में प्रभावी है, लेकिन उसकी लागू होने की समयसीमा स्पष्ट नहीं है।
रोटेशन सिस्टम पर चिंता
आरक्षित सीटें समय-समय पर बदलेंगी
सांसद अपने क्षेत्र में लंबे समय तक काम नहीं कर पाएंगे
इससे विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
BJP बनाम कांग्रेस: मुख्य अंतर
BJP: हमने बिल पास कर महिलाओं को अधिकार दिया
कांग्रेस: हम समर्थन में हैं, लेकिन लागू करने में देरी और संरचना पर आपत्ति है
दोनों दल महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन विवाद लागू करने की समयसीमा, OBC आरक्षण, परिसीमन और राजनीतिक मंशा को लेकर है।
यानी, कांग्रेस का विरोध बिल से नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन और ढांचे को लेकर है।