
सरायकेला में इन दिनों अवैध लॉटरी के बढ़ते नेटवर्क को लेकर आम लोगों और बुद्धिजीवियों के बीच गंभीर चर्चा हो रही है। क्षेत्र में पहले प्रशासन द्वारा अवैध नशा कारोबार पर की गई सख्ती से काफी हद तक नियंत्रण देखने को मिला है, लेकिन अब अवैध लॉटरी का धंधा तेजी से पैर पसारता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अवैध कारोबार शहर से लेकर गांवों की गलियों तक फैल चुका है। “लखपति बनने” के लालच में लोग बड़ी संख्या में इसमें शामिल हो रहे हैं, जिसका असर सीधे परिवारों पर पड़ रहा है। कई घरों में आर्थिक संकट गहरा गया है, चूल्हे तक ठंडे पड़ रहे हैं, जबकि पारिवारिक कलह और झगड़े आम हो गए हैं।
चर्चाओं के अनुसार, इस अवैध लॉटरी कारोबार में समाज के लगभग हर वर्ग और हर उम्र के लोग जुड़ते जा रहे हैं। बताया जाता है कि केवल जिला मुख्यालय क्षेत्र में ही प्रतिदिन 3 से 4 लाख रुपये तक का अवैध लेन-देन हो रहा है।
सूत्रों की मानें तो इस कारोबार को गुप्त स्थानों से संचालित किया जाता है, जहां प्रशासन की नजरों से बचते हुए लॉटरी टिकट छपवाए जाते हैं। इसके बाद एजेंट इन्हें पॉकेट में भरकर शहर से गांव तक बेचने निकल पड़ते हैं। कार्रवाई के दौरान कभी-कभार एजेंट पकड़े भी जाते हैं, लेकिन मुख्य संचालक अब तक कानून की पकड़ से दूर रहते हैं।
कुछ एजेंटों का दावा है कि इस नेटवर्क के संचालकों की पहुंच “नीचे से ऊपर तक” है और कई विरोध करने वाले लोगों को भी मासिक भुगतान किया जाता है। यही वजह है कि वे बेखौफ होकर इस धंधे को चला रहे हैं और संख्या बल के कारण आम लोग शिकायत करने से भी कतराते हैं।
अब क्षेत्र के बुद्धिजीवी वर्ग और अमन-पसंद नागरिक प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि जैसे अन्य अवैध कारोबारों पर सख्ती की गई, वैसे ही अवैध लॉटरी पर भी तत्काल प्रभाव से कार्रवाई कर इस बढ़ती सामाजिक समस्या पर रोक लगाई जाए।